Friday, May 15, 2026
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इंदौर में 75 लाख की चोरी की गाड़ियां बरामद

चोरी की गाड़ियां बेचने वाले शातिर गिरोह को क्राइम ब्रांच की टीम ने पकड़ा है। इनके पास से फर्जी नंबर प्लेट लगी एक गाड़ी और दूसरे राज्यों की 6 गाड़ियां बरामद हुई हैं। कुल 75 लाख रुपए की इन गाड़ियों के साथ चार आरोपियों को पकड़ा गया है। सभी आरोपी पेशे से मैकेनिक हैं।

डीसीपी क्राइम ब्रांच इंदौर, राजेश कुमार त्रिपाठी ने बताया कि मुखबिर से सूचना मिली थी कि चार संदिग्ध लोग चोरी की गाड़ियां बेचने के लिए ग्राहक तलाश रहे हैं। ये गाड़ियां राधिका कुंज कॉलोनी स्थित एक गैरेज के पास खड़ी थीं। सूचना के आधार पर क्राइम ब्रांच की टीम ने वहां पहुंचकर घेराबंदी की और चारों आरोपियों को पकड़ा।

ये है पकड़ाए आरोपी पकड़ाए आरोपियों में वसीम खान पिता अब्दुल रसीद 40 निवासी स्वर्ण बाग कॉलोनी, मितुल उर्फ अक्षय पिता नितीश डेविड 40 साल निवासी गोल्डन फॉर्म सोसाइटी निरंजनपुर देवास नाका इंदौर, अमजद पिता अहमद खान 42 निवासी पाटनीपुरा मुगादम का चाल, आफताब पिता अकतर खान 33 निवासी गौहर नगर खजराना है।

इनके पास से 7 चारपहिया वाहन बरामद किए गए हैं, जिनमें अर्टिगा, फॉरच्यूनर, एक्सेंट, आई-10, स्विफ्ट टूर, नेक्सॉन और बलेनो शामिल हैं। इन गाड़ियों की कुल कीमत करीब 75 लाख रुपए आंकी गई है। आरोपियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया गया है। ये गाड़ियां चोरी की और अमानत में खयानत वाली भी है। ये गिरोह पिछले एक साल से सक्रिय है।

पूर्व में पकड़ाए आरोपी से कनेक्शन

डीसीपी त्रिपाठी ने बताया कि गिरोह का कनेक्शन पहले पकड़े गए आरोपी सन्नी उर्फ शुभम नागर से भी जुड़ा है। सन्नी को एनडीपीएस एक्ट के तहत एमडी ड्रग्स के साथ गिरफ्तार किया गया था। उसके खिलाफ तेजाजीनगर थाने में गाड़ियों की हेराफेरी का केस दर्ज है। उसने एक नेक्सॉन गाड़ी आरोपियों को बेचने के लिए दी थी, जिसे भी जब्त कर लिया गया है। आरोपियों ने गाड़ियां उज्जैन और सांवेर में बेची थी, जहां से गाड़ियां बरामद की गई है।

चोरी की गाड़ियों का शेप बदलकर बेचते थे

डीसीपी क्राइम ब्रांच ने बताया कि ये जानकारी भी मिली है कि कुछ लोग बैंक से गाड़ी फाइनेंस कराई और बैंक के फाइनेंस का पैसा ना देना पड़े और इन गाड़ियों को किसी ओर को बेच दिया। बैंकों की ऐसी गाड़ियों को ये आरोपी किसी को बेच दिया करते थे। यहां ये गैरेज संचालित हो रहा था, वह वसीम का है। ये आरोपी गाड़ियों के इंजन और चेसिस नंबर को भी खराब कर देते थे। ताकि उसकी पहचान ना हो सके। इसके अलावा ये गाड़ियों के नंबर प्लेट बदल लेते थे और यहां तक की गाड़ियों के शेप तक बदलकर बेच दिया करते थे। आरोपियों ने फॉरच्यूनर गाड़ी पर वेस्ट बंगाल की नंबर प्लेट लगा दी थी। ये जानकारी भी सामने आई है कि ये गाड़ियां बाहर की थी, जिन्हें यहां लाकर बेचा जा रहा था। इन सभी गाड़ियों के मालिकों की जानकारी निकाली जा रही है।

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