सागर जिले के बडोदिया नोनागिर गांव में दलित परिवार के सदस्यों की हत्या के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई और मप्र सरकार को नोटिस जारी किया है।
सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को अंजना अहिरवार और उसके भाई व जीजा की हत्या के मामले में सुनवाई हुई। याचिका में पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज (PUCL) द्वारा दलितों की हत्या और उनके परिवार के खिलाफ अन्य अत्याचारों को लेकर जुलाई 2024 में आई जांच रिपोर्ट भी संलग्न की है।
याचिकाकर्ता ने मामले में प्रदेश के पूर्व गृहमंत्री और उनके करीबियों के शामिल होने के चलते सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में कराने और निष्पक्ष जांच के लिए केस सीबीआई को सौंपने की मांग की है। सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति जेके माहेश्वरी और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार की पीठ ने याचिका संख्या 000041/2025 पर सुनवाई करते हुए मध्य प्रदेश राज्य और सीबीआई को नोटिस जारी कर याचिकाकर्ता की मांग पर उनका जवाब मांगा है।
अंजना की मां ने दायर की है याचिका
याचिका मृतका अंजना की मां ने दायर की है। इसमें आरोप लगाया गया है कि छेड़छाड़ पीड़िता अंजना और प्रत्यक्षदर्शी बेटे नितिन और जीजा राजेंद्र की संदिग्ध परिस्थितियों में हत्या कर दी गई। याचिकाकर्ता ने मध्य प्रदेश के पूर्व गृह मंत्री भूपेंद्र सिंह (विधायक) और उनके करीबियों पर हत्या कराने का आरोप लगाते हुए कहा कि उनके राजनीतिक प्रभाव के कारण निष्पक्ष जांच संभव नहीं है। जांच को बाधित करने के लिए प्रत्यक्षदर्शियों की हत्या भी आपराधिक षड्यंत्र का परिणाम थी। जिसमें गांव के दबंग भी शामिल थे।
पिछले साल मई में हुई थी अंजना की मौत परिवारजनों का आरोप है कि 26 मई 2024 को जब अंजना अपने चाचा राजेंद्र अहिरवार का शव एम्बुलेंस में लेकर लौट रही थी। तब पुलिस ने साजिश करके संदिग्ध परिस्थितियों में उसकी हत्या करा दी। याचिकाकर्ता की ओर से यह भी कहा गया है कि नितिन (लालू) की हत्या के बाद अंजना को पूर्व गृह मंत्री के घर बुलाया गया। यहां उसे उनके खिलाफ गवाही न देने की धमकी दी गई और समझौते के लिए 2 करोड़ रुपए की पेशकश की गई, जिसे अंजना ने ठुकरा दिया।
परिवार का आरोप- पूर्व मंत्री ने समझौते के लिए दबाव बनाया
अंजना ने 26 फरवरी 2024 को पुलिस विभाग के आला अफसरों से शिकायत की थी। जिसमें उसने बताया कि आरोपी धमका कर मामले में समझौता करने के लिए मजबूर कर रहे हैं। परिवार के अनुसार, नितिन की हत्या के तीन महीने बाद पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह ने उन्हें बुलाकर मामले को आगे न बढ़ाने और मीडिया को यह बताने को कहा कि उन्हें प्रशासन से पूरा सहयोग मिल रहा है। अंजना को मीडिया के सामने दिए जाने वाले बयान की टाइप की हुई प्रति भी दी गई। लेकिन उसने ऐसा करने से मना कर दिया। कुछ महीनों बाद, एक बार फिर समझौते की कोशिश की गई, लेकिन अंजना और उसके परिवार ने इनकार कर दिया।
हत्याकांड के आठ आरोपी अरेस्ट
पुलिस ने शुरुआत में 9 नामजद और 4-5 अज्ञात आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया था। अज्ञात में से 4 और की पहचान हो चुकी है। सभी बरोदिया नोनागिर के रहने वाले हैं।
- BJP नेता व पूर्व जनपद उपाध्यक्ष कोमल सिंह ठाकुर (66)। पेशे से किसान।
- BJP नेता विक्रम सिंह ठाकुर (40)। कोमल का बेटा। मुख्य आरोपी है। (गिरफ्तार)
- BJP नेता आजाद सिंह ठाकुर (36)। कोमल का बेटा। (गिरफ्तार)
- विजय सिंह ठाकुर (75)। पेशे से किसान।
- नफीस खान (28)। मोबाइल रिपेयरिंग की शॉप है।
- लालू खान (31)। किसानी का काम करता है।
- सुशील सोनी उर्फ गोलू (43)। ज्वेलरी शॉप है। स्कूल वैन भी चलाता है। (गिरफ्तार)
- इस्लाम खान (37)। किराना दुकान है, अखबार का एजेंट भी। (गिरफ्तार)
- वहीद खान (58)। किसानी का काम करता है।
इन चार आरोपियों के नाम बाद में जोड़े गए
- अनीस खान (28) (गिरफ्तार)
- फहीम खान (22) (गिरफ्तार)
- अभिषेक रैकवार (18) (गिरफ्तार)
- अरबाज खान (19) (गिरफ्तार)



आर्टिकल 32 के तहत लगाई क्रिमिनल रिट पिटीशन
सुप्रीम कोर्ट में अंजना अहिरवार की मां के वकील मीनेष दुबे ने बताया कि हमने आर्टिकल 32 के तहत क्रिमिनल रिट पिटीशन लगाई है। अंजना (20) की हत्या से पहले उसके भाई और फिर उसके चाचा की हत्या हो गई थी। एक साल के अंदर एक ही परिवार के तीन लोगों की हत्या हो जाती है। राज्य की पुलिस अंजना के केस में कोई एफआईआर दर्ज नहीं करती है। इसे हमने सुप्रीम कोर्ट में चैलेंज किया है। इस मामले में हमने सीबीआई जांच की मांग की है। आज सुप्रीम कोर्ट ने हमारी दलीलें सुनने के बाद सीबीआई और मप्र सरकार को नोटिस जारी किया है। कोर्ट से यह मांग भी की है कि सीबीआई की जो भी जांच टीम बने उसमें मप्र के बाहर के अधिकारी हों।




